Separate yourself


Separate yourself


‘Therefore come out from them and be separate, says the Lord. Touch no unclean thing, and I will receive you.’ 2 Corinthians 6:17

What do you stand for? Everything we embrace and practice in our lives says something about us. In the same way, everything that we keep away from and be separate from too makes a statement about who we are.

Imagine a day when you wear spotless white and go out and find puddles on the road. Would you walk on just like any other day? No, you will keep an eye on all the puddles and steer clear from all of them because you don’t want even one spot from them to be on you. Just one spot will change the character of your spotless white dress and make it a ‘dirty’ dress.

The Lord reminds us to stay away from the things of the world that can draw us away from oneness with Him. Every pleasure that entices your mind and heart has the power to rob you of your chance to make it to heaven. Would you like temporary pleasure or would you rather have a permanent happiness that no one can take away from you? The temporary pleasures will cause you to lose your soul. The permanent happiness will bring you eternal life and everything beyond your dreams as you live with the Lord in heaven. If you want this ‘come out from them and be separate’ and ‘touch no unclean thing’ of the world.

Prayer:

“Dear Jesus, I keep falling for some temptation or another, help me Lord, to separate myself from all that is not pleasing to you. Teach me to walk in your way and to obey your Word always, Amen.”


अपने के पृथक करें !!!

इस लिए प्रभु कहता है, कि उन के बीच से निकलो और अलग रहो, किसी भी अशुद्ध वस्तु को मत छुओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूँगा। (2 कुर0 6 अध्याय का 17 पद)

आप किस के समर्थन में खड़े होंगे ? हम जिस चीज़ को गले लगा कर अपनाते हैं या फिर जीवन में व्यवहार में लाते हैं वही हमारे विषय में बहुत कुछ बताता है ! इसी प्रकार जब हम अपने आप को कुछ चीज़ों से दूर रख कर उन से अलग हो जाते हैं तब यह व्यवहार भी हमारे विषय में कुछ बताता है।

कल्पना करें कि किसी दिन आपने उजले सफ़ेद कपड़े पहने हों और रास्ते भर कीचड़ से भरे गढ़े हों तो क्या आप अन्य दिनों की तरह ऐसे ही चले जाएँगे ? नहीं ! आप बड़ी सावधानी से हर गढ़े पर नज़र रख कर सड़क पर चलेंगे क्योंकि आप अपने कपड़ों पर कीचड़ का एक भी छींटा पसंद नहीं रहेंगे। केवल एक ही छींटा आपके स्वच्छ और उजले वस्त्र को दाग़ी बना देता है। और फिर आप के वस्त्रों को एक नाम मिल जाएगा, दाग़ी वस्त्र

परमेश्वर भी हमें याद दिलाता है कि हम संसार की उन चीज़ों से दूर रहें जो हमें परमेश्वर से दूर करती हैं और परमेश्वर से हमारी बनी एकता को तोड़ देती हैं। हर दुनियावी आनन्द जो आप के दिल को अपनी ओर आकर्षित करता है वह आप के स्वर्ग में प्रवेश करने के अवसर को चुरा लेता है। क्या आप को केवल अस्थाई आनन्द चाहिए ? या फिर वह आनन्द जो आप से कोई भी, कभी भी नहीं छीन सके ? अस्थाई आनन्द के कारण आप कभी भी अपनी आत्मा हो हार सकते हैं। परन्तु स्थाई आनन्द आप को अनन्त जीवन दे सकता है। वह अनन्त जीवन जिसके विषय में आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि तब आप परमेश्वर के साथ स्वर्ग मे रहेंगे। अगर आप इस आनन्द को पाना चाहते हैं तो वचन आप से कहता है, प्रभु ने कहा, इसलिए उन के बीच में से निकलो और अलग रहो। किसी भी अशुद्ध वस्तु को मत छुओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूँगा। सो आईए हम प्रार्थना करें कि यीशु हमें ऐसा करने में हमारी सहायता करे।

प्रार्थना

प्रिय यीशु, मैं एक के बाद दूसरी परीक्षा में किरती रहती हूँ। कृपया मेरी सहायता करें कि मैं आप को इन सब से अलग कर सकूँ जो आप को पसंद नहीं है। मुझे अपनी राह पर चलना सिखाइये और सदा आप के वचनो की आज्ञाओं को मान सकूँ और उनका पालन कर सकूँ। ।। आमीन।।

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