What are you looking for?


Why do we go to church on Sundays? What do we expect? What do we look for? Do we look for some excitement, some one who would praise you? What is the thing that attracts us the most? Of course that is all important for a meeting, but is it enough, is that all we need?

In the gospel of John (John l, 35—42) there is a short story of two brothers which helps us find the real meaning in life. One of the brothers named Andreas runs after Jesus and Jesus asks him, ‘What are you looking for?’ Andreas realizes that it was Jesus who he was looking for and he runs back to his brother full of joy. Andreas tells him that he has met the Messiah.

Only by acknowledging Jesus as the Messiah, Andreas and his companion became young men of Jesus. We know them as men of God, not because they are called so, but because they had passed on the joyful message.

Many a times when we go to church on Sundays, we want to hear great messages, few go to portray themselves as good church going Christians, few for the songs etc etc. The sad part is very few of us go seeking the Lord, desperately wanting to hear Him speak.

Just like the way Jesus asked Andreas, He is asking us today; ‘What are you looking for?” If we are looking for Jesus, we can ask for Him, and He will invite us to be one of His chosen men. We might be a failure in life, but by becoming His chosen we can actually lead a victorious life. There might be instances when we did get the invitation which we didn’t accept. We might have felt too weak, too imperfect or even because we might completely fail. No worries let’s allow ourselves to be invited again.

आप क्या खोज रहे हैं ?

हम रविवार को चर्च क्यों जाते हैं ? हम वहाँ से क्या पाना चाहते हैं ? हम क्या खोजते रहते हैं? क्या हम किसी उत्तेजना को खोज रहे हैं, या किसी ऐसे व्यक्ति को खोज रहे हैं जो आपकी प्रशंसा करेगा? वह क्या चीज़ है जो हमें सब से अधिक आकर्षित करती है? हा यह किसी भी सभा के लिए महत्त्वपूर्ण है, पर क्या यह काफी है? क्या हम केवल इतना ही चाहते हैं?

यहुन्ना रचित सुसमाचार के 1 अध्याय के 35 से 42 पद में दो भाईयों की एक कहानी लिखी है जो हमें जीवन के सही अर्थ को समझने में सहायता करती है। उन में से एक भाई जिसका नाम अन्द्रियास था यीशु के पीछे दौड़ कर गया और यीशु ने उस से पूछा, तुम क्या खोज रहे हो?” तब अन्द्रियास ने अनुभव किया कि वह तो यीशु को ही ढूँढ रहा था, तब वह दौड़ कर अपने भाई के पास वापस चला जाता है और अपने भाई से कहता है मैं ने मसीहा से मुलाकात कर ली है।

केवल यीशु को मसीहा के रूप में मान्यता देकर ही अन्द्रियास और उसके साथी यीशु के युवा चेले बन पाए थे। बाद में वहीं परमेश्वर के लोग कहलाए थे। ऐसा इस लिए नहीं हुआ था क्योंकि वे बुलाए गए थे वरण इस लिए हुआ था क्योंकि उन्होंने यीशु के आनन्दमय सुसमाचार को आगे बाँटा था।

अनेक बार जब हम चर्च जाते हैं तब हमारे अन्दर महान वचनों को सुनने की इच्छा रहती है, कुछ लोग केवल इस लिए जाते हैं कि वे बताना चाहते हैं कि वे अच्छे मसीही है क्योंकि वे नियमित रूप से हर रविवार को चर्च जाते हैं, फिर कुछ लोग अच्छे गीतों को सुनने की प्यास को लेकर जाते हैं। पर सब से दुख की बात है कि बहुत कम लोग यीशु को खोजने जाते हैं। वे इस बात के लिए लालायित नहीं रहते हैं कि यीशु उन से बात करे और वह उसकी बात को सुनें।

ठीक वैसे ही जैसे यीशु ने अन्द्रियास से पूछा था, वैसे ही वह आज हम से पूछ रहा है, “आप क्या खोज रहे हैं?” यदि हम यीशु को खोज रहे हैं तो उससे कहें और वह आप को निमन्त्रण देगा कि आप उसके चुने हुए मनुष्य बन जाएँ। हो सकता है हम जीवन में पूरी तरह हार चुके हों, पर उसका चुना हुआ बनने के बाद हम एक विजयी जीवन बिता सकते हैं। हो सकता है ऐसे अवसर आए हों जब उसने हमें बुलाया हो पर हमने उसका न्यौता कबूल न किया हो। हमें लगा हो कि हम तो बहुत तही कमज़ोर हैं, हमारे अन्दर बहुत सी कमियाँ है, या हम फिर से पूरी तरह असफल हो जाएँगे। मेरा सुझाव है, चिन्ता न करें उसे एक बार और अवसर दें कि वह आप को फिर से निमन्त्रण दे।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s