Love that intercedes


“Therefore he is able to save completely those who come to God through him, because he always lives to intercede for them.” ~ Hebrews 7:25

A man walking on the beach one day found a little boy picking up something and throwing it back into the sea. Getting closer, he found that the boy was picking up starfishes that had come ashore and putting them back into the sea. Smiling the man said, ‘Hey boy, why are you doing this? There are so many of them… look… the whole beach is full of them… and besides for how many can you do this?’ The boy continued what he was doing and replied, ‘I’m doing this because it matters for this one…..and this one….and this one’

Jesus prays for each one of us. Why? ‘Because it matters to this one (you)…and this one (me)…and this one…’ He never fails us. We make it through life each day not because of our own strength, money, status, power, influence or wellness, but because of God’s great love for us. Lamentations 3:22 says, ‘Because of the Lord’s great love we are not consumed, for his compassions never fail.’

Many things seem to consume us – a prolonged sickness, emotional pain, broken relationships, being cheated or abused, problems at home or work, a financial crunch, a delayed answer, a long period of waiting.….but praise God that we are not consumed by them. Jesus upholds us in prayer and that’s keeps us going.

Jesus loves each of us individually and personally. His love is the kind that intercedes, that implores, that pleads…..for you to be blessed, protected and be well. He does it because it matters to you and because You matter to Him.

Prayer
“Dear Jesus, your love is amazing. I’m so blessed to know how much you care for me. Thank you for interceding for me. Amen.”

प्रेम जो मध्यस्थ बन जाता है

इसी लिए जो उसके द्वारा परमेश्वर के पास आता है, वह उनका पूरा उद्धार कर सकता है, क्योंकि वह उनके लिए विनती करने को सदा जीवित है।
(इब्रानियों 7 : 25)

एक व्यक्ति जो समुन्दर के किनारे चल रहा था उसने एक छोटे लड़के को कुछ उठा कर बार-बार समुन्दर में फेंकते देखा। कुछ निकट जाकर उसने देखा कि वह उन स्टार मछलिओं को वापस समुन्दर में फेंक रहा था जो लहरों के साथ बह कर रेत पर आ पड़ीं थीं। उस व्यक्ति ने मुसकरा कर उस लड़के से पूछा, “अरे बेटा, तुम यह क्या कर रहे हो ?” देखों तो यहाँ पर कितनी सारी पड़ी हैं, सारा समुद्र तट उन से भरा है। फिर एक बात बताओ, तुम किती उठा कर बचा सकते हो? उस लड़के ने अपना कार्य जारी रखते हुए उत्तर दिया, “मैं ऐसा इस लिए कर रहा हूँ क्योंकि इसको आवश्यक्ता है, इसको आवश्यक्ता है और इस को और इस को…”

यीशु भी हम में से हर एक के लिए प्रार्थना करता है। क्यों ? इसलिए कि यह इसके लिए (आपके लिए) कुछ अर्थ रखता। इसके लिए(मेरे लिए है) इसके लिए, इसके लिए….वह हमें कभी भी शर्मिन्दा नहीं होने देता है। हम जीवन के हर दिन पर विजय पाते तो हैं पर अपनी ताकत, अपने धन. अपने ऊँचे स्तर, सामर्थ, प्रभाव, या बहुत अच्छे होने के कारण से नहीं पर इस लिए क्योंकि परमेश्वर हम से बेहद प्रेम करता है। विलाप गीत के 3 अध्याय के 22 पद में लिखा है, “परमेश्वर के अदभुत प्रेम के कारण ही हम नष्ट नहीं हुए हैं। कयोंकि यह उसकी महा करुणा का फल है क्योंकि उसकी दया अमर है।”

बहुत सी चीज़े हमें नाश कर सकती हैं जैसे – लम्बी बीमारी, भावनात्माक पीड़ाएँ, टूटे सम्बन्ध, धोखा, शोषण, घर की समस्याएँ या कार्य स्थान की समस्याएँ, आर्थिक परेशानी, किसी बात का उत्तर मिलने में देरी, लम्बी प्रतीक्षा आदि। परन्तु परमेश्वर की स्तुति हो कि हम उनके द्वारा नाश नही हुए हैं। यीशु सदा हमें प्रार्थना में उठा कर रखता है इसी लिए हम सुरक्षित हैं और आज भी जीवित हैं।

यीशु हम सब से निजि और अपना जान कर बेहद प्रेम करता है। उसका प्रेम ऐसा है जो सदा हमारे लिए मध्यस्थ बन जाता है, हमारे लिए याचना और प्रार्थना करता है कि हम आशीषित हो जाएँ, हम सुरक्षित और भले-चंगे रहे। वह ऐसा इस लिए करता है क्योकि यह आप के लिए महत्त्वपूर्ण है और आप उसके लिए महत्त्व रखते हैं।

प्रार्थना

प्रिय यीशु, आप का प्रेम अदभुत है। मैं बहुत आशीषित हुई हूँ यह जान कर कि आप मेरी इतनी परवाह करते हैं। आप का लाख-लाख धन्यवाद कि आप मेरे लिए मध्यस्थ बन कर परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं। मेरा धन्यवाद ग्रहण करें। यीशु के नाम से माँग लेती हूँ। ।।आमीन।।

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