Hemmed in


“You hem me in—behind and before; you have laid your hand upon me.” ~ Psalm 139:5
The little baby girl lay all wrapped up and nestled close to the mother. She was fast asleep, safe and sound. Totally unaware of the surroundings, there she lay so calm, so at peace. She didn’t have to bother about anything. She was well taken care of, she was protected. Her mother was keeping a watch on her.
Protection is one of the prime concerns of life. We all want and need to be protected. Ensuring protection over our lives is not a matter of our own doing. We may take insurance cover against accidents, diseases, death or mishaps. But we have no control over such things. We cannot stop them from happening with our human strength. All our insuring efforts can prove helpful only to a certain extent, beyond which we have to trust God to protect us. And in His faithfulness He does so.
As a garment is hemmed in, we are hemmed in within the arms of God; we are enveloped within His loving care. So we need not fear or get anxious and worried. God watches over us. And His protection is sure and double fold – behind and before.

Prayer
“Dear Jesus, I thank you that You watch over me in loving care. I thank you for your protection over me. I am safe in Your hands. Amen.”
My protection is in God

घेर कर रखना

तूने मुझे आगे पीछे घर रखा है, अपना हाथ मुझ पर पखे रहता है।
भजन संहिता 139:5

एक छोटी सी लड़की कपड़ों में लिपटी अपनी माँ के पास लेटी थी। वह एक सुरक्षित और गहरी नींद में सो रही थी। वह एक दम शान्त और चुपचाप थी। उसे अपने आस-पास के वातावरण की कोई चिन्ता नहीं थी। उसकी भली प्रकार देखभाल और रक्षा की जा रही थी। उसकी माँ उसकी चौकसी कर रही थी।

सुरक्षा मनुष्य की एक प्रमुख आवश्यक्ता है। हम सब को सुरक्षा की ज़रूरत है। अपने जीवन को सुरक्षित रखना केवल हमारे ही हाथों में नहीं है। हम सुरक्षा के लिए जीवन बीमा करा सकते है दुर्घटना में घायल होने का, किसी बिमारी का, यहाँ तक कि मृत्यु का या फिर किसी प्रकोप का। पर इन पर शारीरिक शक्ति के प्रयोग से नियन्त्रण कर पाना सम्भव नहीं है। जीवन बीमा किसी सीमा तक तो आशावादी सिद्ध हो सकता है पर उसके पश्चात् हम केवल परमेश्वर पर ही भरोसा रख सकते हैं और वह विश्वास योग्य है इसी कारण वह हमारे लिए सब कुछ पूरा करता है।

जिस प्रकार एक वस्त्र एक छोटे बच्चे को चारों ओर से लपेट कर सुरक्षित रखता है उसी प्रकार परमेश्वर हमें अपनी बाहों में लपेट लेता है। हमें परेशान होने या फिर चिन्ता करने की आवश्यक्ता नहीं है। परमेश्वर एक माँ है और एक माँ के समान हमारी चौकसी करता है। उसकी सुरक्षा दोहरी है। जैसा भजन में लिखा है दाउद ने कहा, “तूने मुझे आगे पीछे घेर रखा है।”

प्रार्थना

प्रिय यीशु, मैं आप का धन्यवाद करती हूँ कि आप प्रेम से मेरी चौकसी करते हैं। मैं आपकी सुरक्षा के लिए आपका धन्यवाद करती हूँ। मैं सच में सुरक्षित हाथों में हूँ। आने वाले समय में भी मेरी इसी प्रकार रक्षा करें। यीशु के नाम से माँग लेती हूँ। ।।आमीन।।

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