Keep running and obey


“You were running a good race. Who cut in on you and kept you from obeying the truth?” ~ Galatians 5:7

On the first day to work, we are fully charged and enthusiastic about our work. We feel our zeal will take us through for miles. A few weeks later we come across something that dampens our spirits and it is a great blow to us. We lose enthusiasm and the sense of joy we had in our work. Months later it is a struggle just to get ourselves out of bed and go to work.

At the back of our minds we think, ‘Perhaps there is a better place, better working conditions, better people in some other place’ and then a string of events follow until we bid goodbye to them. Unfortunately for us, there is no place that is perfect with perfect people or perfect working conditions, we will find always something lacking everywhere.

Jesus was perfect – sinless and completely whole. Yet He lived in this imperfect world and related to imperfect people like you and me. What kept Him going was that He knew what He was doing and why. He knew He was on earth to fulfill His Father’s perfect will. This kept Him focused on His goal and He completed His mission to bring glory to His Father.

We too have a mission and purpose that God has chosen for us individually. People may mess things up for us but our God is great enough to correct all these messes and mistakes and make things work out well for us. Shouldn’t we stop thinking about earthly problems and concentrate on the One who truly rewards us for every good work and deed?

Prayer:
“Dear Jesus, Lord help me keep my eyes on You so I can draw strength and encouragement from You to do my work well. Amen.”

प्रकाशन तिथि

दौड़ते रहो पर आज्ञाओं को भी मानते रहो
तुम तो भली भाँति दौड़ रहे थे अब किसने तुम्हें रोक दिया है कि सत्य को न मानों।(गलातियों 5:7)

काम के पहले दिन, हम सब पूरी सामर्थ और उत्साह से काम करने के लिए तैयार होते हैं। तब हम सोचते हैं कि हमारा जोश हमें मीलों का रास्ता पास करने में सहायक होगा। कुछ हफ्ते बाद हम कुछ ऐसा देख लेते हैं जब हमारा जोश ठण्डा पड़ जाता है और यह वार बहुत ही घातक होता है। तब हमारा सारा जोश ठण्डा हो जाता है और काम करने का आनन्द भी समाप्त हो जाता है। महीनों बाद हम भारी संघर्ष करते हैं कि किस प्रकार बिस्तर छोड़ कर उठें और काम पर जाएँ।
अपने मन के किसी कोने में हस सोचते हैं, शायद कोई बेहतर स्थान होगा जहाँ पर हम काम कर सकते हैं जहाँ काम करने की परिस्थितियाँ यहाँ से अच्छी होंगी और जहाँ के लोग यहाँ से बेहतर होंगे। तब एक के बाद कुछ घटनाएँ होंगी जो हमें उस काम को छोड़ने पर मजबूर कर देंगी। पर देखा जाए तो कहीं पर कोई सर्वगुण सम्पन्न जगह नहीं होगी और न सर्वगुण सम्पन्न लोग होंगे। हम हर स्थान पर कोई न कोई कमी अवश्य पाएँगे।

केवल यीशु सर्वगुण सम्पन्न था। – जिसने कोई पाप नहीं किया था और जो सम्पूर्ण था। फिर भी वह इस त्रुटिपूर्ण संसार में रहा और मेरे और आप के जैसे त्रुटिपूर्ण लोगों के साथ संगति की। उसे किस बात ने रहने की शक्ति दी केवल इस बात ने कि जो वह कर रहा है और क्यों कर रहा है। उसे पता था कि वह इस संसार में अपने पिता की आज्ञाओं को पूरा करने आया है। उसने अपना ध्यान केवल इसी एक बात पर रखा था। उसका काम केवल अपने पिता की महिमा करना था।

हमारा भी एक मिशन और प्रयोजन है जिस के लिए परमेश्वर ने हमें अलग-अलग चुना है। लोग शायद हमारे काम को बिगाड़ सकते हैं पर हमारा परमेश्वर उन्हें सुधार सकता है। क्या हमें दुनियावी बातों को सोचना बन्द नहीं करना चाहिए और केवल एक बात पर ध्यान लगाना चाहिए यीशु पर जो हर अच्छे काम का इनाम है।

प्रार्थना
प्रिय यीशु, प्रभु मेरी सहायता करें कि मैं अपनी आँखें केवल आप की ओर लगाए रखूँ ताकि हर समय आप से शक्ति प्रोत्साहन और सामर्थ पाती रहूँ। जिससे सदा अपने काम में सफल हो सकूँ। यीशु के नाम से माँग लेती हूँ। ।।आमीन।।

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