शान्ति का वायदा


ैं कान लगाए रहूँगा कि परमेश्वर यहोवा क्या कहता है, वह तो अपनी प्रजा से

जो उसके भक्त हैं, शान्ति की बातें करेगा। (भजन संहिता 85:8)

 

एक पिता अपने बेटे के लिए एक उपहार खरीद कर घर आते हैं और पता चलता है कि बेटे ने उनकी सबसे अधिक पसंद की चीज़ तोड़ दी है। तब सब से पहले वह गुस्से से अपने बेटे की उसकी भूल के लिए ताड़ना करता है उसकी भूल को सुधारता है और सज़ा भी देता है। पर फिर थोड़ी देर बाद ही उसे अपने पास बुलाता है और समझाता है कि दुबारा उस भूल को न करे। और बाद में उसे वह उपहार भी दे देता है जो वह उसके लिए लाया था। इसी प्रकार परमेश्वर भी हम से गुस्सा हो जाता है। विशेषकर जब हम कोई भूल करते हैं।

वह हमें भली प्रकार एक अच्छी सीमा तक सुधारता है….और जब हम सुधर कर अपना पाठ सीख लेते हैं, तब वह अपने हाथ को एक बार फिर से नम्र कर लेता है। वह किसी का भी तिरस्कार नहीं करना चाहता है। हालाँकि हम सब पापी हैं फिर भी वह हम सब से प्रेम करता है। वह हम से शान्ति का वायदा करता है।

ठीक उसी प्रकार जैसे हमारे माता-पिता हम से कहते है, आग के पास मत जाओ। ठीक वैसे ही परमेश्वर हम से कहता है पाप से दूर रहो। उसे बहुत ही दुख होता है जब हमें किसी प्रकार की चोट लगती है और वह यही चाहता है कि हम सुरक्षित रहें और  हमें कोई नुकसान न हो।

हम कहते हैं कि हम स्वयं से प्रेम करते हैं, तौ भी हम ऐसे कार्य करते हैं जो हमें नाश करते हैं। पर वह हम से इतना प्रेम करता है कि नाश होते नहीं देख सकता है। इसी लिए वह चाहता है कि हम आज्ञाकारी बने जिससे वह हमारी सहायता कर सके और हम बुराई और नाश से दूर रह सकें।

 

प्रार्थना

प्रिय यीशु, मुझे उन सभी समयों के लिए क्षमा करें जब मैं ने आप को पाप कर के दुख पहुँचाया है। प्रभु मेरी सहायता करें कि मैं पाप से मुक्त जीवन जी सकूँ। यीशु के नाम से माँग लेती हूँ।     ।।आमीन।।

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